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MP News: पुलिस कर्मचारियों को मिला बड़ा तोहफा, मध्य प्रदेश के सीएम ने दिया ये जरुरी आदेश !

MP News: एमपी के सीएम मोहन यादव ने पुलिस विभाग को लेकर एक दिशानिर्देश जारी किया है। जिसके चलते सैकड़ों पुलिस कर्मचारियों के अब अच्छे दिन लौटने वाले हैं। जिसे लेकर सीएम ने उज्जैन में समीक्षा की है।

MP News: पिछले एक साल से बड़ी उम्मीदों के साथ बैठे कई पुलिस कर्मचारियों के जल्द ही अच्छे दिन लौटने वाले हैं।

मध्य प्रदेश के नए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पुलिस विभाग के प्रमुख पुलिस महानिदेशक जीपी सुधीर सक्सेना को पुलिस विभाग के लंबित विज्ञापन आदेशों को अविलंब जारी करने के निर्देश दिए हैं।

आपको बता दें कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रविवार को उज्जैन में पुलिस विभाग के अधिकारियों की समीक्षा कर रहे थे। इस बैठक में सभी जिलों के कलेक्टर और एसपी पुलिस अधीक्षक भी मौजूद थे।

आपको बता दें कि मध्य प्रदेश में ऐसे बहुत से पुलिसकर्मी हैं जिनका प्रमोशन कई सालों से रुका हुआ था। पिछली सरकार में पुलिसकर्मियों को कार्यवाहक का पद देकर प्रमोशन दिया गया था, लेकिन यह व्यवस्था बीच में ही बंद कर दी गई। ऐसे में अब पुलिस कर्मियों को अपने कंधों पर बड़ा नाम करने की पूरी चाहत नजर आने लगी है। पुलिस मुख्यालय आने वाले एक-दो दिन में अपने पुलिसकर्मियों की प्रमोशन सूची भी जारी कर सकता है।

सूची तैयार है, बस उस पर मोहर लगनी बाकी है। पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों के मुताबिक पुलिस मुख्यालय ने वरिष्ठता क्रम के तहत प्रमोशन की सूची पहले ही तैयार कर ली है। अब मुख्यमंत्री का आदेश जारी हो गया है। ऐसे में अभी लिस्टिंग पर मुहर लगना बाकी है। इस पर मुहर लगते ही एक-दो दिन में यह सूची जारी हो सकती है।

पहली कैबिनेट मीटिंग उज्जैन में हो सकती है

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन का महत्व बताते हुए कहा कि कैबिनेट गठन के बाद पहली पूर्ण कैबिनेट बैठक मकर संक्रांति के अवसर पर उज्जैन में होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि मकर संक्रांति पर सूर्य के दक्षिणायन से उत्तरायण होने के बाद उज्जैन से ही सूर्य उत्तरायण की ओर बढ़ता है, इसलिए इस बार बैठक उज्जैन में होगी।

स्थानीय निकाय के दफ्तर में करनी होती है जेब गर्म

प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री के साथ-साथ कॉल स्विच का तरीका भी आपको भ्रष्टाचार से बचा सकता है। मध्य प्रदेश में ऐसे कई मामलों में लोकायुक्त पुलिस ने अधिकारियों और कर्मियों को फंसाया है, जबकि नामांकन के लिए रिश्वत की मांग की गई थी। कॉल ट्रांसफर की प्रक्रिया में 15 दिन से ज्यादा का समय लगता है। इस बीच अखबारों में विज्ञप्ति जारी करने के साथ ही पूर्व भवन स्वामी से सहमति ली जाएगी। इसके साथ ही पंजीकृत फाइलों की फोटोकॉपी भी संलग्न की जाती है।

आपको अब धोखाधड़ी से भी मुक्ति मिल सकती है

जिला पंचायत ऋतंभरा द्विवेदी ने बताया कि कुछ मामलों में कॉल ट्रांसफर न होने के कारण लोग एक ही प्लॉट या भवन दो लोगों को बेच देते हैं। आमंत्रण प्रक्रिया शुरू होते ही गलतियों का पता चल जाता है। भूखंड या भवन की रजिस्ट्री के साथ नामांतरण कराने से भी धोखाधड़ी के मामलों से राहत मिल सकती है। हालाँकि, विवादित प्लांट या घर के संबंध में पंजीकरण और कॉल ट्रांसफर का तरीका कैसा हो सकता है? इस सवाल का जवाब सारे संकेत सामने आने के बाद ही मिल पाएगा।

Anu

पिछले एक वर्ष से मैं एक मनोरंजन पत्रकार हूं। फिल्मी जगत में अपना स्थान रखना मेरे पेशेवर करियर का हिस्सा है, लेकिन यह मेरा एक उत्साह भी है। मैं बॉलीवुड और टीवी के प्रेमी हूं और मेरे पास सेलेब्रिटीज के बारे में दिलचस्प गपशप और जानकारियों का एक भंडार है। मैं अच्छी तरह से जानती हूं कि वेबसाइट पर आने वाले रीडर्स क्या देखना पसंद करते हैं।

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